Saturday, December 12, 2009

शैतान और हैवान को भगवान् कैसे समझा जा रहा है

(आसाराम) ऐश और आराम - शैतान बना भगवान

एक पूर्व साधक और सत्संगी की हैसियत से मे ये ब्लॉग लिखना अपना फ़र्ज़ समझता हू. मेरे साथ और मेरे जैसे कई लोगो के साथ असाराम आश्रम मे जो हुआ है और अभी जो हो रहा है उसे रोकना ज़रूरी है. इस ब्लॉग के ज़रिए मे ये बताना चाहता हू के किस तरह भोले लोगो को आश्रम मे फसाया जाता है और उनका मानसिक, आर्थिक और कई मामलो मे यॉन शोषण किया जाता है

अगर आप पढ़े लिखे हैं और धर्म के बारे मे काफ़ी कुछ पढ़ा है तो आसाराम को सुन कर आपको तुरंत ही पता चल जाएगा के आसाराम कोई ग्यानि पुरुष या साधु नही है. वॉ जो भी बोलते है वो श्रीमान ओशो रजनीश की कीताबें पढ़ कर बोलते हैं. वो उनके अनुयायीयों को ये ही सलाह देते हैं के अनुयायी ओशो रजनीश को ना पढ़े. वो ये कहते हैं के ओशो एक खराब व्यक्ति है. (ये वो इस लिए बोलते हैं क्यूंकी अगर कोई और ओशो को पढ़ लेगा तो उसको पता चल जाएगा के आसाराम कितने कम अकल हैं और उनको ज़रा सा भी धर्म का ग्यान नही है)

आश्रम मे दाखिला - सादगी और सात्विकता की बाते करने वाले असाराम (जो ख़ुद वातानुकूलित गाड़ी में घूमते हैं, फलो का रस पीते और दवाइयों का २५०० लाख का बिज़नस करते हैं) कभी भी किसी राह चलते ग़रीब को आश्रम मे जगह नही देते। आपको आश्रम मे तभी जगह मिलती है अगर आप () धनिक हो और काफ़ी पैसा हो (२) अगर आप धनिक नही है तो आपका शारीरिक रूप से बहुत ही मज़बूत होना ज़रूरी है (ताकि आप मारामारी या अपहरण कर सके. आपको बता दूँ के असाराम के खिलाफ खून , आपहरण और ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा करके के कई केस कोर्ट मे कई सालो से चल रहे हैं) (३) अगर आप महिला है तो आपका सुंदर होना ज़रूरी है या फिर ....आप अपना सर्वस्व स्वामीजी के नाम अर्पण करने के लिए तैयार हो। () अगर आप उपर दिए गये तीनो मे समाविष्ट नही है तो फिर आप कोई डॉक्टर या लॉयर हो ताकि आप आश्रम के केस मे मदद कर सके. (कोई ग़रीब बूढ़े अपाहिज को आश्रम मे कभी जगह नही मिलती)

No comments:

Post a Comment